JamiaVoice
हाँ, मेरे जामिया, का वो मीरान है।
हाँ, तेरे जामिया, का वो मीरान है।
हाँ, वही जामिया, जो निगहबान है।
हाँ, वही जामिया, जो तेरी शान है।
हाँ, वही जामिया, जो मेरी जान है।
हाँ, उसी जामिया, का वो मीरान है।
नफ़रतौं से लड़ा, लड़ के आगे बढ़ा ।
साफ़, लफ़ज़ो में, ज़ालिम को ज़ालिम कहा।
नेक दिल, पाक सीरत, वो इंसान है।
जिसका मक़सद, मुहब्बत का पैग़ाम है।
हाँ, वो मीरान है, , , हाँ वो मीरान है।।।
हाँ, मेरे जामिया का, वो मीरान है।
हाँ, तेरे जामिया का वो मीरान है।
जामिया के लिए जो हमेशा लड़ा।
जो मुसीबत, में रहता है, हर पल खड़ा।
वक्त कहता है, उसका चलो साथ दें।
तुम अकेले नहीं हो, चलो ये कहें।
ताकि तहज़ीब, अपनी ये ज़िंदा रहे।
ताकि अपने चमन में परिंदा रहे।
वो परिंदा जो शबगीर, शाहिन हो।
जिसका मक़सद मुहब्बत की तालीम हो।
क्या मुहब्बत मिटाना ये आसान है? ? ?
हाँ, मेरे जामिया का वो मीरान है।
हाँ, तेरे जामिया का वो मीरान है।
©अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
नोट --ये नज़्म 3/4/2020 में लिखकर अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया था।
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