कल बदलने के लिए, आज बदलना होगा Poem by Anjum Alinagari

कल बदलने के लिए, आज बदलना होगा

कल बदलने के लिए,
आज बदलना होगा।

अपनी मंज़िल के लिए,
घर से निकलना होगा।

कोई जज़्बात में आ जाए तो
उससे कह दो
पुर फ़ितन दौर में, ग़ुस्से को
निगलना होगा।

जब वो निकला था, सफ़र पे तो
कहा था उसने
अब अकेले ही सफ़र में,
हमें चलना होगा

भिड़ आएगी, लगा देगी
किसी घर में आग।
अब उसी आग में,
नेताओं को जलना होगा।

ज़हर सी बात जो करते हैं
सरे आम आकर,
ऐसे लोगों से, मुहब्बत से ही
मिलना होगा
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Thursday, August 6, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal,hindi
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कल बदलने के लिए आज बदलना होगा
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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