ये सरजमीं उन्हीं की है, उन्हीं का है ये आसमां Poem by Anjum Alinagari

ये सरजमीं उन्हीं की है, उन्हीं का है ये आसमां

ये सरजमीं उन्हीं की है, उन्हीं का है ये आसमां।
ये सोच कर खड़े हुए, डटे हुए हैं नौजवां।।।

यक़ीन है , हर एक के बदन में गर्म ख़ून है।
जो मांग है जवान का वो मांग सब ‌जनून है।

लगे रहे, जो उम्र भर , किताब की तलाश में।
निकल चुके हैं घर से अब, वो ख़्वाब की तलाश में।

वो ख़्वाब, ख़्वाब ए हक़ भी है, वो ज़िंदगी का‌ सच भी‌ है।
वो मक़सद ए हयात है, वो ख़ुद में काएनात है।।।

मगर, वो उनके ख़्वाब को, क़लम को और किताब को।
समझ नहीं रहे हैं सच, जो झूठ की मशीन हैं।

जो झूठ की मशीन है, न उन पे अब यक़ीन है।
वतन के पासबानों को, वतन के नौजवानों को।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Friday, July 24, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal,urdu,hindi
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नौजवानों के आंदोलन के अवसर पर
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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