इस ज़मीं पे जो चांद तारा है Poem by Anjum Alinagari

इस ज़मीं पे जो चांद तारा है

इस ज़मीं पे जो चांद तारा है।
इस ज़मीं का वही सहारा है।

याद रखिए, किसी का हो न हो
पर मगर , मुल्क ये हमारा है।

जिससे ये मुल्क मेरा रौशन है,
तू ने उस रौशनी को मारा है।

क़लम, काॅपी, किताब है उनका
लाठी, डंडा तो बस तुम्हारा है।

ज़ुल्म की दास्तां सुनाने को
हमने इस वक्त को गुज़ारा है।

तू ने बस ख़्वाब ही नहीं तोड़ा,
तू ने तो घर का घर उजाड़ा है।

नौजवां देश का समंदर है,
नौजवां देश का सितारा है।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
छात्र ही इस ज़मीं के चांद और तारे हैं।
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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