शिक्षा का मंदिर न तोड़ो Poem by Anjum Alinagari

शिक्षा का मंदिर न तोड़ो

शिक्षा का मंदिर न तोड़ो ।
मुल्क की ख़ातिर कुछ तो छोड़ो।

Gen Z जाग चुका ‌ है मानों।
कुछ अच्छा ‌ करने की ठानों।

हाथ लगाना, पड़े न भारी।
दुनिया देख रही है सारी।

नफ़रत का अब खेल न खेलो।
ज्ञान मुहब्बत का कुछ ले लो ।

पढ़े लिखे, आंदोलनकारी।
पंजाबी हों, या बिहारी।

जान रहे हैं सच्चाई को।
जौहर की सब अच्छाई को।

जिसने देश को, देश बनाया।
मुल्क को भी आज़ाद कराया।

उनके नाम की युनिवर्सिटी
जहां पढ़ेंगे , बेटा बेटी।

उनको जब तुम तोड़ोगे।
देश को पीछे छोड़ोगे।

घर को तोड़ा, दिल को तोड़ा,
फिर भी तुम को चैन नहीं।
कौन है कहता, इस हरकत से
Gen Z आज बेचैन नहीं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर यूपी के 40 में 38 बिल्डिंग को तोड़ने आदेश के ख़िलाफ़ आवाज़ देती ये नज़्म
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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