हालात पूर ख़तर है। Poem by Anjum Alinagari

हालात पूर ख़तर है।

हालात पूर ख़तर है।
ख़तरे में अपना घर है।

वो लोग उड़ रहे हैं
जिनको न बाल व पर है।

ख़ाली मुहब्बतों से
अब गांव और शहर है।

है इल्म जिनके अंदर
उनकी नहीं क़दर है।

हालात से लड़ें वो,
मरने का जिनको डर है।

दुनिया की जिंदगी तो
बस मौत का सफ़र है।

अल्लाह का है प्यारा
सजदे में जिसका सर है।

है बर्ग, इसलिए तो
सर सब्ज़, हर शजर है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Thursday, August 6, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal
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दुनिया की हक़ीक़त बताती हुई ग़ज़ल
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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