इश्क़ ताज़ा गुलाब जैसा है Poem by Anjum Alinagari

इश्क़ ताज़ा गुलाब जैसा है

इश्क़ ताज़ा गुलाब जैसा है।
हू ब हू मेरे ख़्वाब जैसा है।

इश्क़ की दास्तां बताती है,
इश्क़ दिल की किताब जैसा है।

इश्क़, जिससे भला हो लोगों का,
इश्क़ वो आफ़ताब जैसा है।

इश्क़ करना नहीं है जुर्म लेकिन
इश्क़ बिल्कुल शराब जैसा है ।

इल्म ने इश्क़ से कहां जाकर
इश्क़ में सब, हिसाब जैसा है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Monday, August 3, 2026
Topic(s) of this poem: hindi
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इश्क़ की हक़ीक़त
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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