कटा जो सर हुसैन का,
अली के नूर ए ऐन का।
यज़ीद हो गया पलीद
हुसैन हो गए शहीद।
हुसैन हक़ के पासबां
हुसैन फ़ख्र ए दो जहां।
दिलों में बसने वालों में
हुसैन सा कोई कहां।।
ये इश्क़ है हुसैन से।।
और उनके वालिदेन से ।
© अंजुम अलीनगरी
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