घर का खाओ, घर में खाओ। Poem by Anjum Alinagari

घर का खाओ, घर में खाओ।

प्यारे बच्चों,
घर का खाओ, घर में खाओ।
बिला वजह न बाहर जाओ।
बाहर का जो खाते हैं।
वो बिमार पर जाते हैं।

इसलिए,
घर का खाओ, घर में खाओ।
बिला वजह न बाहर जाओ।।।।

प्यारे बच्चों,
न खा चर्बी, न पी ठंडा।
खा तू सब्ज़ी, खा तू अंडा।
दुध दही खोआ खाया कर।
शाम में खेलने को जाया कर ।।।
शाम ढले तो घर आया कर ।
खाने में न शर्माया कर ।।।
इससे सेहत रहेगी अच्छी।
उम्र तुम्हारी अभी है कच्ची ।
अपने बड़ों की बात मानों।
अपने आप को तुम पहचानों।
क्यों आख़िर तू डरा डरा है ।
जब जज़्बा और जनूं भरा है।।।

ठानो पहले क्या करना है।
मेहनत से तुमको पढ़ना है।
राह में मुश्किल आएगी पर
मुश्किल से तुमको लड़ना है।।

अहद करो तुम अहद करो ।
बच्चों, दिल से अहद करो।।।।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Tuesday, August 18, 2026
Topic(s) of this poem: motivation
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बच्चों के लिए
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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