बात न जीत की है, न हार की है Poem by Anjum Alinagari

बात न जीत की है, न हार की है

बात न जीत की है, न हार की है।
बात इस मुल्क के, नौजवानों के वक़ार की है।

जहां प्यार से दिल जीता जाता था कभी
वहां बदतर हालात हक़ की , हक़दार की है।

इल्म कितना, अक़ल कितना, शु'ऊर कितना हो
अस्ल क़िमत यहां, अमल की, किरदार की है।

उस को बदनाम किया जाता है, गाली देकर
जिसकी पहचान मुहब्बत की, वफ़ादार की है।


अब न ख़ामोश रहेंगी, ये वतन की सड़कें,
ये ख़बर प्यारी, किसी आज के अख़बार की है।

© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Friday, July 24, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal,urdu
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हालात की अक्कासी
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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