उसने दिल में ठाना है Poem by Anjum Alinagari

उसने दिल में ठाना है

उसने दिल में ठाना है।
वक़्त पे आना जाना है।

बच्चे ख़ाली भले‌ हों बैठे
लेकिन नहीं पढ़ाना है ।

बैठ गए तो बैठ गए
बैठ के हुकूम चलाना है।

मसले का हल कैसे निकले
मक़सद जब उलझाना है।

जान रहे हैं ख़ाक नहीं
फिर भी रोब जमाना है।

जिनके आगे पीछे दस हो
उनको क्या समझाना है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Monday, July 27, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal
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ऐसे शिक्षक शिक्षिकाओं पर ये ग़ज़ल तंज़ करती है, जो वक्त पे स्कूल आते तो है लेकिन बच्चों को पढ़ाते नहीं हैं
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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