'कलाम' सा कलाम कर Poem by Anjum Alinagari

'कलाम' सा कलाम कर

'कलाम 'सा कलाम कर ।
मुहब्बों को आम कर ।

जो इल्म से मिलें ग़नी
तो, उनका एहतराम कर ।

चमक उठेगी ज़िंदगी
जो कह गए, वो काम कर ।

वो दे गए सबक़ हमें,
तू सादगी में, नाम कर ।

'कलाम'की किताब का
तू पहले इंतज़ाम कर।

बेकार की ही बात में
न यूं ही सुबह-शाम कर ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Monday, July 27, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal
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APJ Abdul Kalam पर लिखी गई ये नज़्म उनकी शख्सि़यत को रेखांकित करती है
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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