दोस्तों ! दोस्ती, रब का ईनाम है।
प्यार, इश्क़ व मोहब्बत, का पैग़ाम है।
इस की ख़ुशबू से लबरेज़ है ये जहां।
ये चमन, ये फ़िज़ा, ये ज़मीं , आसमां।
हर क़दम ज़िन्दगी की ये पहचान है।
राह मुश्किल को करती ये आसान है।
दिल की बेहतर ग़ज़ा, का ये एक नाम है।
दोस्तों, दोस्ती , रब का, ईनाम है।
इसकी क़िमत अदा कौन कर पाएगा।
इसके बिन सब तड़प कर के मर जाएगा।
है अमन ये सकूं, या है जज़्बा जनूं,
दोस्त हैं जिनके अच्छे वो बतलाएगा।
है यक़ीं ये मेरा , ये सदा आम है।
दोस्तों, दोस्ती , रब का, ईनाम है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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