आंदोलन जीवी, दिमाग़ी नक्सल। Poem by Anjum Alinagari

आंदोलन जीवी, दिमाग़ी नक्सल।

आंदोलन जीवी , दिमाग़ी नक्सल।
युवा देश के, मसलों का हल।

शक्तिशाली , शिक्षित, ज्ञानी।
सच्चे पक्के हिंदुस्तानी।
प्यार अमन से, प्यार वतन से,
करने वाले , Gen Z प्राणी ।

बोलो खुल कर, सब मिल जुल कर,
आज है जिनका, उनका है कल।
युवा देश के , मसलों का हल ।
आंदोलन जीवी, दिमाग़ी नक्सल।।।।।।

रहबर हैं ये , राही हैं ये।
बहुत काम के भाई हैं ये।
अड़ जाते हैं , लड़ जाते हैं।
जीत के ही ये, घर जाते हैं।।
जी जान से , मेहनत करते।
दल और बल से ये न डरते।।।

मन से इतने साफ़ हैं ये सब,
जैसे जल में , गंगा जल।
युवा देश के, मसलों का हल।।।
आंदोलन जीवी, दिमाग़ी नक्सल।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Tuesday, August 18, 2026
Topic(s) of this poem: reveloution
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री ने 'दिमाग़ी नक्सल' जैसे शब्द का प्रयोग कर राजनीतिक संदेश देकर पढ़े-लिखे लोगों के बीच भूचाल पैदा कर दिया।‌ लोगों की प्रक्रिया को देखकर उनकी संवेदना को गीत की शक्ल दिया गया। इसमें बताया गया है कि दरअसल असल दिमाग़ी नक्सल कौन हैं
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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