नेता जी दिल तोड़ो और दल तोड़ो Poem by Anjum Alinagari

नेता जी दिल तोड़ो और दल तोड़ो

नेता जी,
दिल तोड़ो और दल‌ तोड़ो।
नफ़रता का मुद्दा छेड़ो ।

आप की यही तो ख़्वाहिश है,
लड़ लड़ कर तुम सर फोड़ो।

नेता जी,
राज करने का राज़ है ये
क्या बेहतर, अंदाज़ है ये?

नेता जी, नहीं, नहीं --
देश के हक़ में सही नहीं है।
दुनिया में ये कहीं नहीं है।।।
बुल्डोजर से घर तोड़ो ।
और हवा का रुख़ मोड़ो।।।।।।

नेता जी, सच तो यही है

पैसा ख़ूब कमाते हो,
पेपर लीक कराते हो,
करते हैं सवाल अगर तो
मुद्दे से भटकाते हो ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

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नेताओं की मंशा पर नज़्म के ज़रिए सवाल
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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