आज़ाद इस वतन के परवाने हम सभी हैं।
गंगो - जमन चमन के, दीवाने हम सभी हैं।
मेरे लिए वतन है एक प्यार की निशानी।
दिल में रची-बसी है इस मुल्क की कहानी।
बुलबुल चहक रही है, जुगनू चमक रहे हैं।
इसके अमन की खातिर क़ुर्बान है जवानी।
तारीख़ जान करके, अंजाने हम सभी हैं।
आज़ाद इस वतन के परवाने हम सभी हैं।
कर दूर अपने दिल से, बोग़ज़ो हसद, कुदूरत।
मिलकर रहें यहाँ सब, है बस यही ज़रूरत।
सारे जहां की दौलत, इज़्ज़त मिली है, शोहरत।
कितना अज़ीम है ये, कितना है ख़ूबसूरत।
हिंदी हैं हम वतन के, बेगाने हम नहीं हैं।
आज़ाद इस वतन के, परवाने हम सभी हैं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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