बेटी है इंक़िलाबी वो जो ज़िद पे अड़ी है Poem by Anjum Alinagari

बेटी है इंक़िलाबी वो जो ज़िद पे अड़ी है

बेटी है इंक़िलाबी वो, जो ज़िद पे अड़ी है।
चट्टान बन कर सामने गाड़ी के खड़ी है।

जिस हौसले से ज़ुल्म का देती जवाब है।
लगता है एहतिजाज हमें, इंक़िलाब है।

डर ख़ौफ़ मिटा कर के, घर छोड़ कर आई।
बस हक़ के लिए, लड़ रही है आज लड़ाई।

इंसाफ़ की उम्मीद है, दिल में जनून है।
बेटे से ज़्यादा गरम अब, बेटी का ख़ून है।

बदलेगी ये सियासत, इस मुल्क की भी हालत ।
बेटी की है ये चाहत, बस दूर हो जेहालत।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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