नौजवां जब जागेगा।
अपना हक़ वो मांगेगा ।
कुर्सी जब थर्राएगी
होश में तब ही आएगी।
इंक़लाब जब आएगा
चैन व सकूं सब पाएगा।
इतना पहले करें यक़ीं।
नफ़रत से हो पाक ज़मीं।
रंग बिरंगे फूल खिलेंगे।
सही राह पे अगर चलेंगे।
जन्नत का गहवारा होगा ।
मुल्क जहां में प्यारा होगा।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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