अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए Poem by Anjum Alinagari

अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए

अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए।
ज़ुल्म को बस ज़ुल्म कहना चाहिए।

ऊठ खड़ा हो रोक दे , हैवानियत।।
आज कहती है मेरी इंसानियत।।

दो सज़ा वहशी को और शैतान को।।।
ताकि वो पहचान ले इंसान को।।

बे वजह न ख़ून बहना चाहिए।।
अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए।।

नफ़रतों की बीज बोना छोड़ दे।।।
हर क़द़म ऊल्फत बढ़े ये ज़ोर दे।।

है अगर तुझ को मोहब्बत हिन्द से।।।
नौजवाॅ बेदार हो जा नींद से।।

है हक़ीक़त हक़ तो मिलना चाहिए ।
अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए।।
रचना -: अंजुम अलीनगरी
दरभंगा, बिहार

अब नहीं ख़ामोश रहना चाहिए
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
Close
Error Success