नशा मुक्त हो भारत अपना Poem by Anjum Alinagari

नशा मुक्त हो भारत अपना

मांग है मेरी, है ये सपना।
नशा मुक्त हो भारत अपना ।

गुटखा, खैनी, पान, सुपारी।
होती है इस से बिमारी।

सिगरेट, चीलम, दारू शराब ।
फेफड़ा, लीवर करता ख़राब।

नशा से नाश, सब हो जाता है।
मौत की नींद जब सो जाता है।

पी कर चलाए जब कोई गाड़ी।
हड़िया हो या ताड़ का ताड़ी।

अहद करें ये सब मिल जुल कर,
करें न हरगिज़ उसकी सवारी।

तम्बाकू, है जान का दुश्मन।
जो करते हैं, इसका सेवन।।।

वो भी बहुत पछताएंगे,
भांग अगर चे खाएंगे।।।।

एक दिन कैंसर हो जाएगा
बेमौत ही मर जाएगा।।।।

नशा को छोड़ो, फल को खाओ।
घर में बच्चों को समझाओं।।।।

नशा से दूर रहेंगे बच्चे।
तभी बनेंगे, प्यारे अच्छे ।।।

घर को तुम आबाद करो,
नशा से न बर्बाद करो ।।।

अपना फ़र्ज़ निभाना होगा।
क़सम सभी को खाना होगा।।।

दूर नशा से रहेंगे हम ।
ग़लत नशा को कहेंगे हम।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Wednesday, August 5, 2026
Topic(s) of this poem: addiction,drugs
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नशा भारत में ही नहीं दुनिया भर के लिए एक बड़ी समस्या है।‌ नशा मुक्ति की बात पर लिखी गई कविता
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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