अये वतन के पासबां, अये हम वतन Poem by Anjum Alinagari

अये वतन के पासबां, अये हम वतन

अये वतन के पासबाॅ, अये हम वतन ।
दिल, जिगर है, जिस्मों जां है ये चमन।

शक से मुझको देखना तु छोड़ दे।।
नफरतों से रिश्ता नाता तोड़ दे।।

प्यारो ऊल्फत की सदाऐं आम कर।।
आ गले मिल, साथ चल और नाम कर।।
है जरूरत हिन्द को, तू ला अमन।।।
अये वतन के पासबां, अये हम वतन।।

धर्म है इंसानियत के वासते ।।
खोल देती है हर एक बंद रास्ते।।।
ये सियासत बांट देती है हमें।।
मुझको मुस्लिम कहती है, हिन्दू तुम्हें।।

आ ज़रा अब साथ आ, इंसान बन।।।
अये वतन के पासबां, अये हम वतन।।

रचना &लेख: -अंजुम अलीनगरी
Darbhanga, Bihar

अये वतन के पासबां, अये हम वतन
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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