चलो अहद करके , चलें अपने घर से।
है उम्मीद दिल की, दिलों के शहर से।
दुआओं में शामिल रखें हो सके तो।
है अर्ज़ी हमारी, यहां हर बशर से।
खुदा राह आसान कर दे हमारा।
मिले हर ख़ुशी, पाएं मंजिल, सफ़र से।
दयारे मोहब्बत! चला आ रहा हूँ।
हूं जो भी अभी तक तुम्हारे असर से।
है इल्म व हुनर की हमेशा से चाहत।
जो मिलता नहीं है, कहीं मालो ज़र से।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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