क, टुआ, मुल्ला कहा, उग्रवादी कहा Poem by Anjum Alinagari

क, टुआ, मुल्ला कहा, उग्रवादी कहा

क* टुआ, मुल्ला कहा, उ*ग्रवादी कहा।
उस मुसलमान को , आ*तंकवादी कहा।

जिनको कहते हैं दानिश अली प्यार से ।
जिनको उल्फ़त, मुहब्बत है हक़दार से ।

जो उठाते हैं संसद में, आवाज़ को।
पसंद करते हैं सब, जिनके अंदाज़ को ।


साफ़ सुथरी है, प्यारी है जिनकी ज़ुबां।
दर्दे दिल आज वो कर रहे हैं बयां।

ये तो हमला है, सारे मुसलमान पर ।
मेरे भारत के असली निगहबान पर ।

मेरे, भारत को नफ़रत ने रूसवा किया ।
कुंवर ने साफ़ लफ़्ज़ों में, ये कह दिया।

नए संसद भवन में, जो गाली पड़ी ।
ये है गाली नहीं, ये है साज़िश बड़ी।।।।

आने वाले इलेक्शन का ये खेल है।
ऐसे लोगों की असली जगह जेल है।

भरी संसद में जो काम उसने किया।
प्यारी दिल्ली को बदनाम उसने किया ।

ये क़सम मिल के खाना पड़ेगा हमें।
नफ़रतों को हराना पड़ेगा हमें।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
संसद दानिश अली को अपशब्द कहे जाने पर लिखी गई कविता
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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