कुछ मेहमान थे, कुछ मेज़बान
लेकिन सभी थे, नेकदिल इंसान,
मिले थे कल, देने को बल
ताकि निकले मसले का हल ।
गए थे हम सब नकटी डैम
ज़्यादा सर थे, कम थीं मैम ।
नाश्ता चाय , अंडा तोड़ा।
खेल खेल में बैलून फोड़ा।
हौज़ी, गाना, नज़्म, कविता
मज़े मज़े में, वक्त ये बीता ।
सीनियर, जुनियर, ओहदा, शान
लेकिन सबकी एक ज़ुबान।।।
शिक्षक संघ ने जोड़ा था
कंट्रीब्यूशन थोड़ा था ।।
पहाड़ी और झील के बीच ।
कम ही लोगों की है रिच ।।।
बैठ कर बिरयानी का खाना
कुड़ा कचरा, दरी उठाना ।।।
क़ुदरत के अनमोल रत्न के
साथ में तस्वीरों का लेना।
ऐसा पल है, जिसमें कल है
©अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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