चेहरा बदला
गुरूवार, ३ सितम्बर २०२०
हम कहते थे "गाँव हमारे"
शहर की तरफ जाते थे मारे-मारे
सपने होते थे साकार हमारे
खुश हो जाते थे सारे गाँववाले
समय बदला, चेहरा बदला
कोरोना ने ले लिया बदला
गाँव होते गए आबाद
शहर होने लगे बर्बाद।
शहर की गंदगी
काम नही इ हमारी बंदगी
हमने कुदरत से ले ली खफ़गी
खतरे में आ गए हमारी जिंदगी।
शर को ले लिया अपनी गिरफत
बढ़ा दी सबके लिए आफत
लोग जाने लगे गाँव की ओर
गाँव में मिला कुदरत का आवकार
कोरोना का हमला होने लगा बेकार
ताज़ी सब्जिया और हवा कारुख
कहने और खाने में आने लगा सुख।
ये कुदरत की है महामारी
सब पर पड रही है भारी
होने लगी है बेरोजगारी
पर सब को है जिंदगी प्यारी।
सर सलामत तो पगड़िया सारी
कुदरत का प्रकोपबिगाड़ देता है व्यवस्था हमारी
पर हम है तैयार निपटने को
मिलझुलकर सम्हाल लेंगे सबको।
डॉ जाडीआ हसमुख
Poem: 59104390 - चेहरा बदला..Chehra Member: Sharad Bhatia Comment: गुरुजी सादर प्रणाम एवं सुप्रभात, गुरुजी आप की रचना दिल को छू जाती है बिल्कुल सही कहा आपने, कि हम सब मिल कर संभाल लेगे, नहीं आने देगे कोई आँच
Aashawadi wachan suhane. Gaon ho rahe aabad hum ji rahe meherban. Fin ho ya raat bas kare rahe baat ki kaise bach aaee hum sab korona ke haanth. Dhanyawad.
गुरुजी सादर प्रणाम एवं सुप्रभात, गुरुजी आप की रचना दिल को छू जाती है बिल्कुल सही कहा आपने, कि हम सब मिल कर संभाल लेगे, नहीं आने देगे कोई आँच
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Poem: 59104390 - चेहरा बदला..Chehra Member: Varsha M Comment: Aashawadi wachan suhane. Gaon ho rahe aabad hum ji rahe meherban. Fin ho ya raat bas kare rahe baat ki kaise bach aaee hum sab korona ke haanth. Dhanyawad.