अंधभक्ति कै नशा Poem by Gaya Prasad Anand 'Anand Gondavi'

अंधभक्ति कै नशा

अंधभक्ति कै नशा
जबसे चढ़ा
अन्याय अत्याचार
ख़ूब बढ़ा
इंसानियत भाई चारा
सब ख़तम होइ गवा
जबसे हिंसा पर मनई
उतारू भवा
मनई - मनई पर
अब तौ भारु भवा

- गया प्रसाद आनन्द
(आनन्द गोंडवी)

अंधभक्ति कै नशा
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