शक्की साढ़ू Poem by Gaya Prasad Anand 'Anand Gondavi'

शक्की साढ़ू

एक कुकुर अपने गाँव के कुतिया से
आशिक़ी मा पास होइ गवा
वहि गाँव वालेन कै
केहू कै फूफा भा, केहू कै जीजा भा
सब रिश्तन मा खाश होइ गवा
दूर कै साढ़ू जब, ई सब जान पाइन
तौ उनकै मन बहुत उदास होइ गवा
घर पहुचतै अपने घर वाली से
अकड़ कै बोले
कहूँ पहिला नंबर तोहरै तौ नाहीं लगाइस
ई कहतै
पति पत्नी मा बकवास होइ गवा
अइसन साढ़ू औ शक के बीमारी मा
बना बनावा रिश्ता सत्यानाश होइ गवा
एक कुकुर अपने गाँव के कुतिया से
आशिक़ी मा पास होइ गवा

गया प्रसाद आनन्द
(आनन्द गोंडवी)

शक्की साढ़ू
Tuesday, April 22, 2025
Topic(s) of this poem: civil rights
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