Aftab Alam

Gold Star - 39,838 Points (15 th April 1967 / RANCHI,)

तुझे दर्पण बनाया मैं/ Hindi - Poem by Aftab Alam

तुझे दिल में बसाया मैं, तुझे दर्पण बनाया मैं,
तेरी आंखो में झांकू मैं, सवारूं खुद को तुममें मैं,
मेरी अवारगी तेरी, तेरी झुलफों की खुशबू में,
मेरी ख्वाबों की चाहत में, तेरा चेहरा खलिश चेहरा,
मेरी धुंधली निगाहों में, मेरी खामोश आहों में,
इन सुनसान राहों में, तेरी यादों की पनाहों में,
ले चल तू संग अपने, ख्वाबों में बुनूं सपने,
यहां अब दम निकलता है, यहां अब गम ना मिलता है,
गए तुम छोड़ कर मुझको, भला किसके हवाले तुम,
ना तुम रहे अब तुम, रहा अब ना अब भी मैं
तुझे दिल में बसाया मैं, तुझे दर्पण बनाया मैं,
तेरी आंखो में झांकू मैं, सवारूं खुद को तुममें मैं,


Comments about तुझे दर्पण बनाया मैं/ Hindi by Aftab Alam

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Friday, March 13, 2015

Poem Edited: Friday, March 13, 2015


[Report Error]