जीवन का विश्वास.. Jivan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जीवन का विश्वास.. Jivan

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जीवन का विश्वास
शनिवार, २६ अक्टूबर २०१९

कई बार मैंने ऐसा सोचा
खो ना दू में उनको समूचा
मेरे दिल ने भी दी थी मुझे वाचा
की हो जाएगा एक दिन लोचा।

कई बार उन्हें बाहर जाना होता था
दिनों तक बहार रहना होता था
पर नाही दिल में कभी ऐसी सोच उठी थी
और नाही टिस होने पर में रूठी थी।

मुझे उनके चेहरेपर मासूमियत ही नजर आती थी
उनकी बोली में कोई विशेष बू भी नहीं आती थी
मेरे मन उस चीज़ का गवारा नहीं देता था
पर मन को जरूर बुरा सोचनेपर मजबूर कर देता था।

इसबार तो मेरा मन रो ही पड़ा
दिल भी मेरे से लड पड़ा
मुझे दिल का पलड़ा भरी लगा
मन ही मन घुटन महसूस करने लगा।

इसबार उनकी बोली में फर्क सा महसूस हुआ
जो मन नहीं चाहता था वो होकर रहा
"बैठो मेरे पास" मुझे कुछ कहना है
तुम्हारे को दिल की बात बताना है।

मेरा दिल इतनी ही बात पर बैठने लगा
दिल की धड़कन को रोकने लगा
"मेरा तुम्हारे साथ ज्यादा टिक पाना संभव नही "
में तुम्हे कहता हु सही सही।

एक ही बार में मेरे सपनो का महल जमींदोस्त हो गया
मुझे भीतर से तोड़कर रुला गया
क्या इतना ही है लग्नजीवन का सम्बन्ध?
क्यों हो जाते लोग अवैध सम्बन्ध में अंध?

हसमुख अमथालाल मेहता
Courtesy: Art Pal

जीवन का विश्वास.. Jivan
Saturday, October 26, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 26 October 2019

मेरा दिल इतनी ही बात पर बैठने लगा दिल की धड़कन को रोकने लगा " मेरा तुम्हारे साथ ज्यादा टिक पाना संभव नही " में तुम्हे कहता हु सही सही।.......nice poetic expression. Beautiful poem. Thanks for sharing.

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Mehta Hasmukh Amathalal 26 October 2019

एक ही बार में मेरे सपनो का महल जमींदोस्त हो गया मुझे भीतर से तोड़कर रुला गया क्या इतना ही है लग्नजीवन का सम्बन्ध? क्यों हो जाते लोग अवैध सम्बन्ध में अंध? हसमुख अमथालाल मेहता Courtesy: Art Pal Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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