कसक दिल कि Kasak Dil Ki Poem by M. Asim Nehal

कसक दिल कि Kasak Dil Ki

Rating: 5.0

दो दिलों के फ़ासलों को उम्र भर जलना पड़ा,
रात आयी और गई दिन आया और गया I

तुम अकेले भीड़ में, मै भी अकेला भीड़ में,
लोग आये और गए कारवां चलता गया I

मंज़िलें मिलती गई और हौसले बढ़ते गए,
मुड़ के जब पीछे को देखा धुंध और धुंआ मिला I

यूँ तो अक्सर बात करने को न कोई भी मिला,
राज़ दिल में ही रहा और दिल अंधेरों में रहा I

COMMENTS OF THE POEM
Rajan Trajan Renganathan 07 February 2021

Bahut badiya.

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