दो प्रेमी किनारे पर हाथ में हाथ डाले टहल रहे थे,
जबकि अन्य लोग बातें कर रहे और हँस रहे थे,
उसका ध्यान सिर्फ अपनी प्रेमिका पर था,
आज सरे नज़ारे अपनी प्रियतमा के सामने अदृय्ष्य लग रहे थे ।
टकराती लहरों और नमकीन हवा के बीच,
उनकी सहजता का एहसास किये बिना नहीं रहा जा सकता था
क्योंकि जीवन के ये पल सच मुच अध्भुत प्रेम में लिप्त थे,
भावनाएँ आज सहजता से बालों को लालिमा दे रही थी ।
उन लहरों की तरह जो बिना किसी परवाह के आती और जाती हैं,
जीवन के उतार-चढ़ाव से परे, खुशियों से भरे ये पल कुछ कोमल
लेकिन धैर्य और प्रेम के साथ, उन्हें ज्वार पर सवारी करवा रहे थे,
क्योंकि प्रेम और जीवन एक ही हैं,
इसलिए दोनों खुशी, हृदय वेदना और दर्द से भरे हुए हैं।
वाह, इस तरह वे तूफानों और लहरों का सामना करते हैं,
यह वास्तव में उन्हें परिभाषित करता है और हमेशा बहादुर बनाता है।
कब तक यूँही चलते रहेंगे हाथों में हाथ डाल कर,
जीवन ने जो योजना बनाई है उससे कैसे बच पाएंगे ।
लेकिन वे एक दूसरे में अपना रास्ता खोज ही लेंगे,
क्या जाने ये आती जाती लहरें उन्हें यही प्रेरणा दे रही है ।
सूरज ढलने लगा और चाँद निकलने लगा
Bahut khoob