ये कैसा प्यार है? Poem by M. Asim Nehal

ये कैसा प्यार है?

Rating: 5.0

जहाँ रात गवाही दे रही है और लहरें वेदना,
पीड़ा और व्याकुलता को समझने लगी हैं I

एक बच्चे की तरह उसने एक लाल पंखुड़ी वाला गुलाब लिया
और एक-एक करके पंखुड़ियाँ तोड़ने लगा, और साथ साथ वह गिनने लगा
- 'वह मुझसे प्यार करती है', 'वह मुझसे प्यार नहीं करती',

वह गुलाब की दुर्दशा से अनजान था, उसने सभी पंखुड़ियाँ तोड़ दीं।
अब वह ये सोचने पर विवश हो गया कि किसने अधिक कष्ट सहा,
उसने या गुलाब ने। अंतिम पंखुड़ी, निश्चित रूप से,
'वह मुझसे प्यार नहीं करती' पर समाप्त हुई.

हवाएं तेज़ चलने लगी, उठती लहरों के साथ बादल भी छटने लगे
आकाश में जब सितारे साफ़ दिखने लगे, सोचा शायद ये सत्य प्रकट करें
और उसने तुरंत गिनती शुरू की ~
'वह मुझसे प्यार करती है', 'वह मुझसे प्यार नहीं करती'।

रात भर ये सिलसिला चलता रहा, नींद आँखों ही में रह गयी
जैसे ही सूरज ने अँधेरे को चीरना शुरू किया और सितारे फीके पड़ गए,
उसकी गिनती 'वह मुझसे प्यार नहीं करती' पर समाप्त हो गयी
फिर निराशा हाथ लगी, दिन नींद और इंतज़ार में कट गया I

रात आयी फिर गिनती शुरू, अब रोज़ यही हो रहा है ~
वह रात के आने और फिर से शुरू होने का इंतजार करता है,
उसकी गिनती वहीं से, जहां से उसने छोड़ा था शुरू होती है ।

COMMENTS OF THE POEM
Rajan T Renganathan 05 May 2023

Ye anokha pyar hai. Bahut khoob. Pyar kya kya karwata hai... ek pyar Shakespeare wala, Ek Edgar Allan Poe wala aur ek ye wala.

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