जंगल में आग लगी है
और मेरे घर कोसों दूर है
पेड़ पौधे जल रहे हैं
शोले भड़क रहे हैं
मुझे खबर मिली है
जंगल में आग लगी है I
हवा आग भड़का रही है
जानवर कुछ चिल्ला रहे हैं
पंछी घोसलों को छोड़ जा रहे हैं
जंगल में आग लगी है I
आधुनिक युग में हैं हम
खबर तुरंत मिल जाती है
नीले आसमान पर
धुँआ बढ़ता जा रहा है
सब कुछ लाइव दिखाया जा रहा है
जंगल में आग लगी है I
शोले अब लव बन गए हैं
विशाल रूप ले चुके हैं
जानवर अब शहर को चले हैं
नदी भी राख़ से भर गयी है
जलती लकड़ियां बहने लगी है
जंगल में आग लगी है I
मेरा घर कोसों दूर है
मै चाय की चुस्कियां ले रहा हूँ
जानवरों के जान पे बानी है
वो जहाँ तहाँ भाग रहे हैं
आसमान कला हो चला है
हवा कुछ धुँआ उड़ा रही है
जंगल में आग लगी है I
अब धुँआ घर तक पहुँच चूका है
आग सिर्फ टीवी पर दिख रही है
घर मेरा कोसों दूर है जंगल से
मुझे विश्वास है आग यहाँ नहीं आ सकती
कुछ पंछी उड़ते दिख रहे हैं
जानवर शहर आ गए है
मेरा घर शहर के बीच में है
जंगल में आग लगी है I
शहर और जंगल के बीच नदी है
अब आधा दिन बीत गया गया है
कुछ सूचनाएं चेतावनी सी आने लगी है
आग ने महा रूप ले लिया है
वो अब शहर की नदी तक आ चुकी है
मेरा घर फिर भी नदी के दूर है
लेकिन गर्म हवा महसूस होने लगी है
जंगल में आग लगी है
अब जंगल की आग शहर में आ चुकी है
वो शहर जिसे जंगल की आग से मतलब न था
अब चपेट में आने लगा है
सब बेचैन हो गए हैं हाहाकार मचने लगा है
जिन्हे मतलब न था जंगल की आग से
जानवरों की पुकार से
और पंछियों की उड़ान से
उनकी जान पर जब बन आयी
अब दर्द सताने लगा है I
कितने सवाल छोड़ गयी ये आग अपने पीछे
कितने घर झुलसा दिए लौह में अपनी
कितनों की नींदे उड़ा ले गयी ये
कितनों के आशियाने उजाड़ दिए इसने
क्यों न समय रहते हम इससे बुझा सके
क्यों तमाशयी बन देखते रहे बस
अंजाम जानते हुए बेखबर बने रहे बस I
आज समाज को हमने वर्गों बे बाँट दिया है, धर्म के नाम पर जाती के नाम पर, स्थान के नाम पर और न जाने कितने और नए तरीके विभाजन के और खोज लाये हैं, और जब कहीं अत्याचार होता है हम ये कहकर की इससे हमें कोई सरोकार नहीं है तमाशा देखने लगते हैं
Brilliant poem, Kya baat hai, I will translate it in English.
इस कविता में सीक है, कविता सोचने पर मजबूर करती है, आज के हालत की सही समीक्षा करती है
धन्यवाद दीपक जी आपने कविता का सही विश्लेषण किया है और कवी जो कहना छह रहा है उसके अत्यधिक रूप से उजागर किया है I
जंगल में आग लगी है एक कटाक्ष भरी कविता है, हम ये समझ कर संतोष पते हैं की हम सुरक्षित हैं लेकिन कब ये सुरक्षा कवच हट जायेगा इसके बारे मैं नहीं सोचते
हमारे भीतर का इंसान मर चूका है, इंसानियत ख़त्म हो गयी है, ये कविता हमें खुद आईना दिखने का एक प्रयास है, की देखो अपने चेहरों को और सोचो क्या से क्या हो गए हैं हम.