मानवता की सुवास
Monday, October 28,2019
10: 47 AM
अगर आप खुद को बदलना चाहते हो
तो सबसेपहले अपने अंदर झांकना होगा
अपना ही मुख्यांकन करना होगा
अपने आपको दुरस्त करना होगा।
यदि आप में कोई बुराई है
और सदा पीड़ित रहते है
तो सोचो ऐसा क्यों है?
उस से छुटकारा कैसे मिल सकता है?
मुश्किल जरूर है
पर असंभव नहीं है
सब लोग आपके जैसे ही है
पर दिखावा ज्यादा करते है।
कौन यहां राग, द्वेष से परे है!
सब में ये अवगुण भरे पड़े है
अच्छाइया से अड़े हुए हैं
पर अपना वजूद गाड़े बैठे है।
आप मिटटी के पुतले है
कहनेके सब ढकोसले है
वक्त आनेपर कोसते रहते है
जिंदगी को नरक बनाए रखते है।
ज़िंदा रहना चाहते हो तो जीना सीखो
बात- बात पर किसी को ना चीखो
इस से मन को कष्ट पहुंचता है
मन में ग्लानि और दुःख उद्भव होता है
इक बार सोचो तो, निवारण हो सकता है
आदमी अपने आप को ढाल सकता है
अपनी ख़ुशी अपने पास है
मानवता की यही तो सुवास है।
हसमुख मेहता
इक बार सोचो तो, निवारण हो सकता है आदमी अपने आप को ढाल सकता है अपनी ख़ुशी अपने पास है मानवता की यही तो सुवास है। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal
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Every person should change himself from inside and develop inner beauty. Then the society will be changed. An interesting poem is beautifully penned.10