ना कोई डोर थी.. Nakoi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

ना कोई डोर थी.. Nakoi

Rating: 5.0

ना कोई डोर थी
Tuesday, August 18,2020
5: 43 AM

ना हाथ मे कोईडोर थी
ना मंझिल किसी छोर थी
बस मन में तमन्ना कुछ ओर थी
जीने कीबड़ी चाह थी।

चल पड़ा में उसी राहपर
ना भरोसा था किसी और पर
बाँध लिया था सरपर कफ़न
ना बढ़ी थी कभी दिल की धड़कन।

मेरे उत्साह का ना था कोई विकल्प
भले ही आयुष्य मिला था अलप!
कुछ नया करने की ठान ली
सोचा और अपनी जगा बना ली।

दिल थामकर बैठ गया प्रतीक्षा में
कुछ नया होगा अपेक्षा में
क्या रखा है किसीकी उपेक्षा में?
पास तो होना ही है अपनी कक्षा में।

ना डर था किसी को खोने का!
और ना वक्त था सोने का
बस जज्बा ये हिम्मत अपनी थी
बाकी बन गयी वो एक कहानी थी।

आगे होगा वो देखा जाएगा
हवा का रुख भी पहचाना जाएगा
वक्त के रहते सब कुछ करना होगा
सफर इतना आसान तो नहीं होगा।

हम बने है सागर के मरजीवा
नहीं डूबना है बस रहना है तैरना
समंदर के खजाने को है पाना
मकसद में कामयाब हो जाना।

डॉ जड़िआ हसमुख

ना कोई डोर थी.. Nakoi
Tuesday, August 18, 2020
Topic(s) of this poem: august,poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 18 August 2020

समंदर के खजाने को है पाना मकसद में कामयाब हो जाना। डॉ जड़िआ हसमुख

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Mehta Hasmukh Amathalal 21 August 2020

Poem: 59000591 - ना कोई डोर थी.. Nakoi Member: Sharad Bhatia Comment: गुरुजी सादर प्रणाम, बस चलना चाहता हूँ, अपनी एक पहचान बनाना चाहता हूँ अटका कोई जितने मर्जी रोड़े, . बस अपनी पहचान बनाना चाहता हूँ (शरद भाटिया)

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Mehta Hasmukh Amathalal 21 August 2020

बहुत उत्साहित करने वाली रचना आपका बहुत - बहुत आभार आपका छोटा सा शिष्य (शरद भाटिया)

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Sharad Bhatia 20 August 2020

गुरुजी सादर प्रणाम, बस चलना चाहता हूँ, अपनी एक पहचान बनाना चाहता हूँ अटका कोई जितने मर्जी रोड़े, . बस अपनी पहचान बनाना चाहता हूँ बहुत उत्साहित करने वाली रचना आपका बहुत - बहुत आभार आपका छोटा सा शिष्य (शरद भाटिया)

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Mehta Hasmukh Amathalal 19 August 2020

Poem: 59000591 - ना कोई डोर थी.. Nakoi Member: Varsha M Comment: Utsah bhara sandesh. Harna nahi manzil to pana hai cahe fir jo ho jana hai. Dhanyawad.

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Varsha M 18 August 2020

Utsah bhara sandesh. Harna nahi manzil to pana hai cahe fir jo ho jana hai. Dhanyawad.

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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