ना सीखी
शुक्रवार, २८ अगस्त २०२०
ना सीखी हमने होशियारी
बस निभायी है यारी
जो समय आते पड गयी भारी
हम देखते ही रह गए क्योंकी हमें नहीं मिली खेलने को पारी?
जो जिंदादिल है वो दफन नहीं होते
वो है कफ़न पहने हुए चलते
वो मस्तराम है फ़िक्र नहीं करते
बस कुछ कर गुजरने का दम भरते।
मुर्दे क्या खाक बोलेंगे?
कया उनमे है ताकत बोलने की "हम खाल उधेड़ेंगे"?
जवांमर्द तो वो है, जो कहता है" में तारे तोड़ लाऊंगा"
असली मर्दानगी को जरूर दिखलाऊंगा।
हमने शब्दों का जाल नहीं बुनना
पर असली बात को बखूबीसे चुनना
दिल से बतलाना"क्या खराबी है उस में "?
फिर तह तक जाकर सोचना उसी में।
समय बतलाएगा की गम किस में है?
क्या आनद खोने में है या पाने में है!
वो आदमी, आदमीही क्या जिसे सब बात में हर्ज है?
नहीं जानता वो मूरख की उसका फर्ज क्या है?
बहुत रो लिए फटे हुए दूध पर
नहीं मजा ले पाए उसके स्वाद पर!
जिंदगी यूँही कट जाएगी सवालों के गेरे में
अपनों के और गैरो को समजने में।
डॉ जाड़िआ हसमुख
Courtesy: mojju- brave soul.. Zee punjabi
जिंदगी यूँही कट जाएगी सवालों के गेरे में अपनों के और गैरो को समजने में। डॉ जाड़िआ हसमुख Courtesy: mojju- brave soul.. Zee punjabi
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Poem: 59065842 - ना सीखी.. Nasikhi Member: Sharad Bhatia Comment: गुरुजी सादर प्रणाम, बहुत बेहतरीन कविता दिल को छू लेने वाली आभार आपका बहुत - बहुत
गुरुजी सादर प्रणाम, बहुत बेहतरीन कविता दिल को छू लेने वाली आभार आपका बहुत - बहुत
Poem: 59065842 - ना सीखी.. Nasikhi Member: Varsha M Comment: Samay batayegay ke gam kisme hai Kya aanand khone me ya pane me... bahut khoob. Dhanyawad.
Poem: 59065842 - ना सीखी.. Nasikhi Member: Varsha M Comment: Bahut khoob likha hai janaab aapne. Na seekhi koi hoshiyari Bas nibhai yaari....bahut khoob.
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Bahut khoob likha hai janaab aapne. Na seekhi koi hoshiyari Bas nibhai yaari....bahut khoob. Samay batayegay ke gam kisme hai Kya aanand khone me ya pane me... bahut khoob. Dhanyawad.