S.I.R
जब से सर पे हुआ सवार ।
सेन्सस के बाद एस आई आर ।
कभी नहीं आराम किया है।
भूखे प्यासे काम किया है।।
घर घर जाकर फार्म को बांटा।
फिर भी सर को मैम ने डांटा ।
सर ने सर को झुका लिया।
रब ने इज़्ज़त बचा लिया।
अहद किया न थकना है।
बीन बांटे न, रुकना है।
लगभग सारा फार्म बंटा।
मुश्किल से ये सफ़र कटा।।।
फार्म भरा अब लाना है।
यानी फिर घर जाना है।
लाकर फार्म को भरना है।
एप्स पे काम भी करना है।।।
क्या बतलाएं, क्या है हाल ।
लोगों का है कई सवाल।
दिन भर उलझे रहते हैं।।
हर मुश्किल को सहते हैं।
काम को कैसे ख़त्म करें।
कैसे कितना जतन करें।
ताकि मुश्किल हो आसान।
मिले हमें भी कुछ आराम।
यही सोंच कर,
एस आई आर पर, , , ,
मेहनत, लगन है, अपना ध्यान।
प्यारे निगहबान -----
शिक्षक को कुछ नहीं चाहिए,
बस चाहिए सम्मान।।।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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