मैं जो हारा, तो तुम भी हारोगे। Sonum Wangchuk Poem by Anjum Alinagari

मैं जो हारा, तो तुम भी हारोगे। Sonum Wangchuk

मैं जो हारा, तो तुम भी हारोगे।
मैं जो जीता , तो तुम भी जीतोगे ।

मैं हूं चेहरा, असल लड़ाई का‌।।
देश के छात्र की पढ़ाई का ।

मुझ पे इल्ज़ाम वो लगाते हैं।
और मुझको ग़लत बताते हैं ।

फ़िक्र जिनको नहीं है बच्चों की।
नौजवानों की और अच्छों की।

जिनको नफ़रत से प्यार उल्फ़त है।
ऐसे लोगों ‌ की क्या जरूरत है।

ऐसे लोगों को अब हटाया जाए।
नौजवानों को ये बताया जाए।

धर्म से दूर अब सियासत हो।
मुल्क आगे बढ़े, ये चाहत हो।

जान जाए न नौजवानों का ।
मुल्क के हिंदू, मुसलमानों का ।

सारे मज़हब को एक कर डालो।
दिल के अंदर न कोई डर डालो ।।
मरने देंगे न अपने बच्चों को,
इस्तीफ़ा लेकर, ज़ख्म भर डालो ।।।

जंतर-मंतर से ये गुज़ारिश है।।।
सोनम वांगचुक की, बस ये ख़्वाहिश है।

आईना अब उन्हें दिखाया जाए ।
भूखे रहकर, भी मुस्कुराया जाए।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Sunday, July 12, 2026
Topic(s) of this poem: education,student,medical,indian
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छात्र को अपने हक़ के लिए आगे आने का संदेश देती है
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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