Lost! Lost! ! Lost! ! !
A Childhood
Pure, Innocent and Priceless
Lost
...
When two nations decide to fight
so as to test their might,
and satiate their false pride;
The soldiers have no fright;
...
होकर बड़े चाहे जो काम करना,
थोड़ा सा बचपन बचा कर रखना।
दूर कहीं ज़मीं आसमां मिलते हैं,
नाली के पानी में इन्द्र्धुष खिलते हैं,
...
ज़िन्दगी ज़िन्दादिली का नाम है।
मुर्ददिल क्या खाक़ जिया करते हैं।।
सर पर जूनून, दिल में हौसला लिए,
दीवाने नामुमकिन को आसान किया करते हैं।
...
अबीर उड़े, गुलाल उड़े, आशाओं की रंगोली है।
प्रेम रंग में जो रंग जाओ, तो मानो कि होली है।।
छेड़छाड़ है, हंसी हैं ताने, हास्य-विनोद, ठिठोली है।
वैर-द्वेष को फूंक जो डालो, तो मानो कि होली है।।
...
अहा! बचपन के वो दिन।
खेलकूद जब दोष नहीं था,
सिर पर बस्ते का बोझ नहीं था,
धुर मस्ती में दिन थे गुज़रते,
रातें कटती थीं तारे गिन।
...
दीपों की शुभ ज्योति श्रृंखला ने
ध्वस्त किया तिमिर का गर्व;
अमावस्या की रात्रि को उजला
करने आया फिर दीपावली पर्व।
...
श्यामल मेघों से आप्त नभ, तरसे मन को हर्षाता है;
भीषण गर्मी के ताप को हरने, वर्षा के मौसम आता है।
सूखे पेड़ों की तप्त देह पर, यौवन की मस्ती फलती है;
वर्षा की प्रथम फुहार से तृप्त, मिटटी भी कस्तूरी लगती है।
...
रोज़ सुबह
मंद हवा के झोंकों की खनक,
उतावली चिड़ियों की चहक,
अमलतास के फूलों की महक,
...
दुनिया को करके महफ़िल
बन जा तू शम-ए-फरोज़।
इन नापाक अंधेरों के बर-अक्स
एक चाँद बहुत कम है।।
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खौफ़ है रुसवाई का
न नफ़ा-नुकसान का हिसाब।
प्यार इबादत है 'बेलाग'
कारोबार नहीं है।।
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ज़िंदा हूँ ज़िन्दगी का तलबगार नहीं हूँ।
बाज़ार से गुज़रा हूँ खरीदार नहीं हूँ।।
ज़िंदा हूँ...
माफ़ करना न निभ सकेंगे ज़माने के बदचलन,
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जुस्तजु थी बनाएं एक आशियाँ तूफ़ानों के उस पार
हकीकत से रु-ब-रु हो, मौजों को ही घर कर लिया।
ख्वाहिश थी कि ढूँढें एक रास्ता दुश्वारियों के बीच
तल्ख़ सच्चाइयों के मद्देनज़र, शोलों को डगर कर लिया।
...
तेल की दरकार है न जुस्त्जु दियासलाई की,
शमा को उम्र मिलती है परवाने की आह से।
रंग से रौनक है न खुश्बू से है कशिश,
हुस्न है मयस्सर गुल को भंवरे की चाह से।
...
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
ख़ुदा बन्दे से पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है।
ठुकरा कर क्यों मुहब्बत को, अपना ली है तंज नज़र।
चेत जा वक़्त रहते तू, बदल अब डाल यह डगर।
...
कितना समय हुआ जब आपने अंतिम बार अनुभव किया?
श्वास में वायु का आनंद;
जल का जीवनदायिनी स्वाद;
आकाश में तारों का सौन्दर्य;
...
मुस्तकिल ग़मों से दिल के, मरासिम पुराने हैं।
बेज़ा हैं इस मुहब्बत में, उम्मीदें जफ़ाओं की।।
फना हो जाते हैं एक दिन, हर लफ्ज़-ओ-जज़्बात।
सुनाई देती हैं ताकयामत, खामोशियाँ सदाओं की।।
...
जब मेरा नाम गुम जाए,
चेहरा भी बदल जाए,
और शायद मेरी आवाज़ भी
तुम्हें अजनबी सी लगे;
...
How far should one go
in upholding one’s principles?
In my opinion,
all the way;
...
Childhood Lost
Lost! Lost! ! Lost! ! !
A Childhood
Pure, Innocent and Priceless
Lost
On the trapeze of a circus
Or
In the piles of garbage
Or
In the strings of firecrackers
Or
On the steps of a temple
Or
In the threads of a carpet
Or
In the greased utensils of a dhaba
On
On the construction sites
Or
On the bench of a lathe
Or
In the dust of brick kilns
Or
In the garb of need
Or
On the altar of greed
Or
On the sets of glamour
Or
In the glare of limelight
Or
In a begging bowl
Or
On your conscience
If found
Please return
To its Rightful Owner.