यादों का काफिला चल रहा है
अब तो लगभग पचास बरसों से
जो मुड़कर देखु पीछे तो लगे है
कल ही छुआ है इसने मुझे
हवा कुछ बदली सी लगे है
मौसम भी कुछ कहे है
पल छूट गए राह में कहीं
बीत गया एक ज़माना जाने कहीं
वो वादियां, वो फ़िज़ा वो नदियां है अब कहाँ
आईना भी दिखा रहा है चेहरे पर झुर्रियां
वक़्तहै कि बस दौड़ रहा है
दिल है केयादों के मोती चुन रहा है
लम्हों का सफर अब दशकों में आया है
चलते रहेगा ये कारवां जब तक जान है
हवाकुछबदली सीलगे है मौसम भी कुछ कहेहै पल छूट गए राह में कहीं बीत गया एक ज़माना जाने कहीं Wonderful expression! Beautifully penned....10
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
Beautiful..........10 sir....... Ups and downs / happiness and sadness are part of life.... Naila