Rajnish Manga

Gold Star - 141,350 Points (September 10,1951 / Meerut (UP) / Presently at Faridabad (Haryana) , India.)

जिन्हें तुम प्यार करते हो (Hindi) - Poem by Rajnish Manga

जिन्हें तुम प्यार करते हो उन्हें नाराज़ मत करना
न जाने वो तुम्हारी बात को किस रूप में लेंगे

ये मुमकिन है तुम्हारी बात उनके काम आ जाये
संभव यह भी है कि बात उनके दिल को लग जाये

बहुत से लोग अपने दिल के हाथों मात खाते हैं
बहुत से लोग ज़रा सी बात से भी टूट जाते हैं

हैं ऐसे लोग भी जो बात सह जाते हैं हिम्मत से
मगर ऐसे भी हैं जो बात को दिल पे लगा लेंगे

तुम अच्छी बात करते हो भले की बात करते हो
बड़े बूढ़े जवाँ छोटे की वय अनुभव की करते हो

मगर हर शख्स अब अपनी समझ अनुसार चलता है
इसी से मैं ये कहना चाहता हूँ दोस्तों तुमसे

कोई अपना चला जाये न हमसे रूठ के ऐसे
कि फिर से वो हमारे बीच वापिस आ ही न पाये

हमारे वास्ते अनमोल थे, अनमोल हैं सबसे
वही इतने जो प्यारे हैं सदा के लिए बिछड़ जायें...

Topic(s) of this poem: dears, death, depression, life, suicide


Poet's Notes about The Poem

[यह रचना समाचार पत्रों की उन सुर्ख़ियों पर आधारित हैं जिनमें माता-पिता अथवा अध्यापकों की डांट फटकार के परिणामस्वरूप अवसादग्रस्त बच्चे अथवा लम्बे समय तक सास-ससुर व पति की प्रताड़ना से दुखी हो कर महिलायें आत्महत्या कर अपनी जान दे देती हैं]

[This poem is based on the newspaper reports where young boys commit suicide after being ill-treated by their parents or teachers or where young women take their own lives after they are persecuted by their in-laws or their husbands over a period of time]

Comments about जिन्हें तुम प्यार करते हो (Hindi) by Rajnish Manga

  • Akhtar Jawad (1/11/2016 3:41:00 AM)


    The poem is a piece of beauty, I was enchanted. The poet's note helped a lot to understand this poem completely.
    A very well wrote poem.
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    0 person did not like.
  • (1/10/2016 7:21:00 AM)


    बहुत से लोग अपने दिल के हाथों मात खाते हैं
    बहुत से लोग ज़रा सी बात से भी टूट जाते हैं
    भई वाह! बहुत खूब! रजनीश जी
    - UPENDRA SINGH 'SUMAN'
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  • (1/10/2016 7:10:00 AM)


    बहुत से लोग अपने दिल के हाथों मात खाते हैं
    बहुत से लोग ज़रा सी बात से भी टूट जाते हैं
    भई वाह! बहुत खूब!
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  • Abhilasha Bhatt (1/9/2016 6:00:00 AM)


    Beautiful and emotional poem...
    Khud par rakh yakeen ab age hai badna
    Jo beet gai us baat par kyun dil ko bojhal karna
    Umeed k sire se himmat ka daaman pakad k hai jeevan main age chalna..
    Thank you for sharing such a lovely poem sir :)
    (Report) Reply

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Poem Submitted: Saturday, January 9, 2016



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