नई परिभाषा Poem by ramesh rai

नई परिभाषा

मैं लिख रहा हूं जीवन की नई परिभाषा
जन्म और मृत्यु दो चक्र है
जीवन सतत् आगे बढ़ने का नाम है
मृत्यु जीवन का पूर्ण विराम है।

मानव सद्गति की अपेक्षा करता है
मानव मोक्ष की अपेक्षा करता है
जीवन क्रमशः आगे बढ़ता जाता है
अन्ततः मृत्यु के करीब आजाता है।

मृत्यु जीवन का अंतिम पड़ाव है
जन्म जीवन की शुरुआत है
फिर शुरू होता है जीने का संघर्ष
प्राप्त होता है जीवन का नवरंग।

नव रंगों से बना यह जीवन
कितना पावन कितना निर्मल।
Created on 19/9/2025
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@ Ramesh Rai

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