चांदनी का राज्य Poem by Akhtar Jawad

चांदनी का राज्य

Rating: 4.5

बहुत दिन हुए किसी ने एक दिया जलाया था
अब इस दिए का तेल समाप्त हुआ
यह जो थोड़ा सा प्रकाश दिखता है
यह तो इस दिए की बत्ती है
देखिये कब तक यह जलती है

बहुत दिन हुए किसी ने एक फूल खिलाया था
वह फूल तो सूख कर फल बन गया
यह जो जीवन का जंगल दिखता है
यह तो उसके बीजों का चमत्कार है
देखिये कब तक जीवित रहता यह पयार है

यह जो चांदनी धरती पर उतरती है,
यह तो सूर्य की अग्नि की प्रतिबिंब है,
सारी अग्नि अपने अंदर समेट कर,
नारी स्वयं तो जल जाती है,
पर जीवन का बन पीछे छोड़ जाती है

हर पैदा होने वाली बालिका
इस संदेश के साथ आती है,
जब तक माताएं बालिकाएं जानती रहें गई,
सूर्य भी ठंडा नहीं हो सके गा,
रातों पर चांदनी का राज रहे गा

Wednesday, October 28, 2020
Topic(s) of this poem: woman
COMMENTS OF THE POEM
M Asim Nehal 30 October 2020

अति सुंदर जनाब नारी के जीवन का वर्णन इससे बढ़िया कहीं और नहीं पढ़ा मैंने।

0 0 Reply
Varsha M 29 October 2020

Abhar aapka janab. Bahut behatreen nazm ko aankit kiya aapne. Nari bina jiwan adhura. Nari to hai niyati. Dhanyawad.

0 0 Reply
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