एहसास की सावन में,
इन प्यार की बूंदों से,
मन क्यों भींगता है,
ये तन क्यों जलता है,
क्यों दिल ये मचलता है,
ये ख्वाब क्यों सजते हैं?
माँदर क्यों बजते हैं?
एहसास की सावन में,
इन प्यार की बूंदों से,
हवाओं की आहों ने,
सागर की लहरों ने,
जैसे छू दिया मुझको,
तुम्हारी आंखों ने,
जैसे जकड़ लिया तुमने
मुझे अपनी बाहों से,
एहसास की सावन में,
इन प्यार की बूंदों से,
मेरे आंगन में,
फूलों सा दर्पण में,
साँसो की आँचल में,
उम्मीदों के दामन में,
तारों की निगाहों से,
सुरजके धागो से,
कोई बांधता है मुझको,
चाहत की बंधन से,
एहसास की सावन में,
इन प्यार की बूंदों से,
मन क्यों भींगता है,
ये तन क्यों जलता है
Beautiful romantic poem. Loved reading it. Thanks for sharing with us.
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Very well responded to the message of nature that is love only love. Ehsas ke sawan mein, In peyar ki boondon se, Man keyun bheegta hay, Yeh tan keyun jalta hay