सांझ का समय

Rating: 5.0

सांझ का समय, आकाश में एक चाँद दिखाई दिया;
फिर वो ज़मीनपर मुझे देखने के लिए उतरा।

जैसे शिकार के समय बाज, चड़िया चुराता है;
उस चाँद ने मुझे चुरा लिया और लौट गया, आकाश में ।

मैंने खुद को देखा, कुछ नज़र नहीं आया;
उस चाँद में मेरा शरीर आत्मा से तृप्त हो गया जैसे।

उस चाँद में नौ गोले गायब हो गए;
और मेरा अस्तित्व उसमे एसे समां गया जैसे समुद्रमें जहाज़ ।

This is a translation of the poem At The Twilight by Mewlana Jalaluddin Rumi
Saturday, July 25, 2020
Topic(s) of this poem: philosophical
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 25 July 2020

Anything can happen in a poet's imagination through perception. The moon which was dweller in sky fell down in land and in twilight giving smile greeted you. An interesting poem is excellently penned....10

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Aarzoo Mehek 25 July 2020

Tasawuff ki taraf pehli seeRhi khudi ka usmain gharq ho jaana. Beautiful translation of my fav poet Maulana Rumi.10++

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Stopping By Woods On A Snowy Evening