मेरी छाया Poem by Rajnish Manga

मेरी छाया

Rating: 5.0

मेरी छाया
मूल कवि: रॉबर्ट लुई स्टीवेंसन
हिंदी अनुवाद: रजनीश मंगा

मेरी नन्ही सी छाया है जो साथ मेरे आती जाती है,
पता नहीं मुझको कि कितनी काम हमारे वो आती है,
सिर से ले कर पाँव तलक; वो मुझ जैसी बन जाती है
मेरे बिस्तर पर मुझसे पहले कूद के वो चढ़ जाती है.

मजेदार बातें हैं उसकी, कद काठी में चलती उसकी,
बच्चों जैसी नहीं कि जिनकी, ऊँचाई है धीरे बढ़ती;
कभी तो वह लंबी हो जाती जैसे खींचा गया रबड़ हो,
सिमटे तो लघु हो जाती जैसे उसका सर न धड़ हो.

बच्चे खेला कैसे करते इसका है न आभास उसको,
मुझे मूर्ख न सिद्ध करे यह आता है न रास उसको,
वह पीछे मेरे चिपकी रहती हाय है डरपोकन कितनी
अगर छुपूं आया के पीछे शर्म मुझे आ जाती कितनी

एक दिवस, प्रातः वेला में सूर्योदय से पहले यह देखा,
ओस कणों में भीग रही थी वह पीले फूलों की रेखा,
पर मेरी अलसायी छाया बोझिल जैसे हो उनींद में,
बिस्तर पर पड़ते ही छाया मुझसे पहले गई नींद में.

This is a translation of the poem My Shadow by Robert Louis Stevenson
Sunday, September 13, 2015
Topic(s) of this poem: children,imagination,shadow
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 11 November 2018

This is really a beautiful poem on shadow and imagination having touching expression with nice diction. The last stanza is much impressive. Thank you dear Manga ji for sharing this gem with us.

2 0 Reply
Rajnish Manga 11 November 2018

Yes, you have got it right. This is what inspired me to translate this poem into Hindi. Thanks a lot, Kumarmani ji.

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Akhtar Jawad 28 August 2016

A beautiful poem on shadow, a wonderful write.

1 0 Reply
Ajay Kumar Adarsh 23 August 2016

bahut badhiya anuwad kiya aapne sir......

1 0 Reply
M Asim Nehal 04 October 2015

????? ????? ?????? ???? ???? ??? ? ??? ????....10

2 0 Reply
Kumarmani Mahakul 13 September 2015

A beautiful hindi poem so nicely penned and translated. Thanks for sharing. ....10

2 0 Reply
Rajnish Manga 13 September 2015

Thanks for your kind and appreciative comments.

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