Rajnish Manga

Gold Star - 149,542 Points (September 10,1951 / Meerut (UP) / Presently at Faridabad (Haryana) , India.)

वोटर की स्थिति (Hindi) - Poem by Rajnish Manga

(1)

यूँ वोटर भाग्य विधाता है,
पर नेताओं से लुट जाता है.
मेरी राम कथा सुनियेगा
सुनते सुनते सिर धुनियेगा
सभी दिशायें शंकालू हैं,
प्रश्नों के अनगिन भालू हैं.
पतवारों के बिना है नैया,
लहरों से अनजान खिवैया.
**

(2)

चोट तो कोई ख़ास नहीं,
जनता को विश्वास नहीं.
अपने लुटने की लाचारी,
चोट करे दिल पर भारी
ऊँचे सबसे जन गण मन
उनसे ही सौतेलापन.
नेता नेता भाई भाई,
ज्यादातर हैं निरे कसाई.
**

(3)
वोटर क्या चाहता है?

सेवा करो, व्यापार नहीं,
इससे कम स्वीकार नहीं.
सुख में दुःख में एक रहेंगे,
मरते दम तक नेक रहेंगे.
वोटर का अधिकार यही है,
मनमाफ़िक हथियार यही है.
तेरा मेरा क्यों करते हो,
इन झगड़ों में क्यों पड़ते हो.

Topic(s) of this poem: democracy, desire, despondent, leader, master, murder, rights

Form: Free Verse


Comments about वोटर की स्थिति (Hindi) by Rajnish Manga

  • Ajay Kumar Adarsh (8/20/2016 9:46:00 PM)


    awesome lines.......
    मेरी राम कथा सुनियेगा
    सुनते सुनते सिर धुनियेगा
    सभी दिशायें शंकालू हैं,
    प्रश्नों के अनगिन भालू हैं.
    पतवारों के बिना है नैया,
    लहरों से अनजान खिवैया.
    (Report) Reply

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  • Akhtar Jawad (2/10/2016 3:43:00 AM)


    A truthful description of an ugly politics..................... (Report) Reply

  • (11/28/2015 8:52:00 PM)


    Do you have English translation for this poem? (Report) Reply

    Rajnish Manga Rajnish Manga (11/29/2015 2:13:00 AM)

    I am so sorry for not having translated this poem into English, Seema ji. I will surely try to do that.

  • Mohammed Asim Nehal (11/26/2015 3:23:00 PM)


    Wah wah सेवा करो, व्यापार नहीं,
    इससे कम स्वीकार नहीं..................Badhiya....Neta ko yeh baar baar yaad dilate rehna hoga.....Rajnishji...10+++
    (Report) Reply

    Rajnish Manga Rajnish Manga (11/29/2015 2:06:00 AM)

    मैं आपकी बात से पूर्णतया सहमत हूँ, मित्र.

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Poem Submitted: Thursday, November 26, 2015



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