Abhaya Sharma


Abhaya Sharma
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I have been writing some poems in Hindi for a while now.. the first ever poem was written by me when I was a student of Ninth standard at Kendriya Vidyalaya Port Blair..

The second poem was composed much later during my stay at Anand Bhavan.. Vigyaan ki Pooja hogi.. somewhere around 1985-1986..

My poems are available at my website at the following link..
http: //www.abhayasharma.net/kavitayen

I consistently try to keep the language as simple as is feasible without an impact on the intent of what I want to say.. more »

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Best Poem of Abhaya Sharma

Maa to aakhir maa hoti hai - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ तो आखिर माँ होती है
मेरी या तेरी या फिर किसी और की
कैसे माँ से भिन्न भला माँ हो सकती है
सोलह आने सच है - माँ तो आखिर माँ होती है

जन्म-काल से पहले के उन नौ मासों में
बंधन माँ से जुडे हमारे कई बरसों के
काटे नही कटते, नही टूटते किसी तरह से
कहता है दिल - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ, तुम राजाओं की माँ
तुम पीर-फ़कीरों की भी माँ
कैसे चलता जग बिन माँ के
कुछ झूठ नही कि - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ, आज तुम्हारे जाने की बेला आई
मन विह्वल है, भावुक है मेरा विचलित है
कल किसे कहूंगा जाकर माँ सपने अपने
यह मान लिया कि - माँ तो आखिर माँ होती ...

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