Sushil Swamy


Sushil Swamy Poems

1. काश! 4/11/2015
2. मुम्बई 5/10/2015
3. होली 6/6/2015
4. कसक ऐ ग़ालिब 7/12/2015
5. प्रतिस्पर्धा 11/2/2015
6. मोसीकी 5/4/2016
7. नेमत 5/4/2016
8. पैमाना 12/4/2016
9. आकर्षण 12/4/2016
10. पर्व और तारीख 12/4/2016
11. गिला 12/4/2016

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Best Poem of Sushil Swamy

मुम्बई

हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के छिटें
सड्कों पे गिरे अजनबी लशें
हमने सहमना नही सीखा है।
हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,

अर्थ की महता..
छीन सी गयी है हमारी
संवेदनात्मक क्षमता
हमने व्यस्क नही व्यस्त होना सीख है.
हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के छिटें
सड्कों पे गिरे अजनबी लशें
हमने सहमना नही सीखा है।

करेंगें थोडी चिंता
थोडा तर्क
हमें क्या फ़र्क
हमने बस सान्तव्ना कि मोम्बत्ती जलना सीखा है

हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के ...

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