श्रीसूक्त हिंदी पद्यानुवाद Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

श्रीसूक्त हिंदी पद्यानुवाद

श्रीसूक्त हिंदी पद्यानुवाद



डा०नवीन कुमार उपाध्याय












सुवर्ण वर्णा हरितवण^विशिष्ट
पहने हार कंचन रजत समाविष्ट,
चंद्रमावत आनन प्रसन्न चित्त,
हिरण्यमयी देवी महालक्ष्मी,
का कीजिए मेरे लिए आवाहन
हे जातवेदा अग्नि देवता महान
आपको शत कोटि सहस्र नमन।1



उन महान महालक्ष्मी महादेवी,
जो रहतीं हमेशा ही नवल नित्य,
कृपा पूर्ण संग से मिलें स्वण^
अश्व धेनु पुत्र पौत्रादि परिवार,
कीजिए महान महादेवी आवाहन,
हे अग्नि देवता, आपको शत नमन।2







जिन देवी आगे घोटक विराजित,
अनुगामी सुभग रथ सुभ्राजित,
हस्तिनाद को सुन होतीं प्रमुदित,
उन महादेवी का करता आवाहन,
वे महालक्ष्मी करें कृपा कृपा वर्षिणी।3









साक्षात ब्रह्मरुपा, मृदु हास्यकारिणी
स्वर्णावरणावृत्त, भक्तानुग्रहकारिणी
दयाविलासिनी, तेजोमयी पूर्ण कामा,
सरसिजासीना पद्मवणा^ महादेवी,
उन महालक्ष्मी का करते आवाहन
उन महादेवी को कोटि कोटि नमन।4







चन्द्रमा समान शुभ्र श्वेत देदीप्यमाना
मनहर द्युतिशालिनी ललित ललामा,
यशपूण^ वैभव समस्त जगत विजित,
स्वर्गलोक सुर समाज वंदित पूजित,
उदारशीला पद्महस्ता महालक्ष्मी देवी,
कीजिए दारिद्रता सदा के लिए दूर,
कीजिए कृपा कंज अवलोकन देवी!
करता आपके चरण स्मरण वरण
हे देवी! आपके युगल पदपंकज शरण।5




हे सूर्य समान प्रकाशस्वरुपे महादेवी
तुम सदैव अनन्त सामर्थ्यवान देवी,
तुम्हारे तप फलस्वरूप प्रकटे बिल्वतरु
उसी तपकृपा हो जाएं दारिद्रय दूर
अन्त: करण-बाहर जो करते वास
हे महादेवी! भर दो सब जगह प्रकाश।6







हे देवी! देवसखा कुबेर एवं मित्रगण,
धनाधिप मित्र मणिभद्र संगजन
दक्ष प्रजापति कन्या कीर्ति विमल
कृपा पूर्ण दृष्टि दान करें निर्मल
धन यश की हो सदैव अनन्त वर्षा,
इस राष्ट्र में हुए हम समुत्पन्न जन्म,
कीर्ति ऋद्धि प्रदान कीजिए, हे देवी!
हम करते प्रणाम, नतमस्तक, महादेवी! 7




महालक्ष्मी भगिनी अलक्ष्मी अधिष्ठात्री
क्षुधा पिपासा मलीनवर्णा क्लान्ता,
उन क्षीणकाया छाया, कर लें हरण,
दारिद्रय अमंगल तज दें, मेरे सदन
हे महादेवी, हम करते कोटिश: नमन।8













दुराधर्षा नित्यपुष्टा महालक्ष्मी देवी,
गोमययुक्ता पृथ्वी स्वरुपा महादेवी,
सव^भूत स्वामिनी कृपाकारिणी श्री,
उनका करते अपने भवन आवाहन
हे महादेवी, कीजिए कृपा करुणा वर्षण।9









मनोकामना संकल्प हो जाएं सिद्ध,
वाणी की सत्यता में हो जाए समृद्धि,
धेनु आदि संपत्ति, विभिन्न अन्न भोग्य,
यशों की प्राप्ति में हम बन जाएं योग्य,
हे श्री! हमारे सदन आप जाएं पधार,
कीजिए करुणा कृपा, मेरा हर तरह उद्धार।10








लक्ष्मी सुवन कर्दम की हम सन्तान,
हे कर्दम। मेरे सदन आगमन करें सुजान!
पद्माहारधारिणी मां श्रीलक्ष्मी करें स्थापित,
हमारे कुलजन को करें, कृपा करुणाश्रित।11







वारि स्निग्ध वस्तुओं की करें सृष्टि, देवि!
हे श्रीसुत चिक्लीत! मेरे गृह आप करें निवास,
माता महालक्ष्मी संग मेरे कुल सदा वास,
हम चाहते आपकी कृपा करुणा वरुणा।
करते कोटि नमन, पूर्ण करें सदा याचना।12


हे अग्ने! करते हम आपका सदा ही वंदन आद्र^स्वभावा कमलहस्ता पुष्टिरुपा पीतवणा^
पद्महारधारिणी चंद्रमा सम शुभ्रकांतियुता,
स्वर्णमयी महालक्ष्मी देवी का करें आवाहन
कोटि कोटि प्रणाम आपको, कोटि सहस्र वंदन।13






हे अग्ने! जो करतीं दुष्ट जनों का सदैव निग्रह,
तथापि कोमल स्वभाव वाली, करतीं अनुग्रह
मंगलकारिणी अवलंबन प्रदायिनी यष्टिरुपा
सुभगवणा^ स्वण^मालधारिणी सूर्यस्वरुपा
हिरण्यमयी महालक्ष्मी का करें मेरे लिए आवाहन
हम करते, हे अग्नि देवता, कोटि सहस्र वंदन।।14



हे अग्ने! जिनके आगमन से होता प्रचुर संपत्ति
धेनु दास सेवक घोटक पुत्र परिवार शांति
कभी न संग छोड़ने वाली महालक्ष्मी करें निवास
कुल परिवार जन सदा चित्त धरे शांति उल्लास।15


महालक्ष्मी कृपा की हो यदि चित्त में कामना
नित्य प्रति करें संयमशील होकर उपासना
अग्नि में दें घृत आहुति, सप्रेम सहर्ष भावसहित
पंद्रह ऋचाओं के श्रीसूक्त पठन करें श्रद्धासहित16

श्रीहरि:
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डा०नवीन कुमार उपाध्याय

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